
*कथावाचक कृष्ण व्यास ने जनकपुर में हुए सीता स्वयंवर का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया*।
बड़ोद क्षेत्र के ग्राम गड़बड़ा में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन पंडित सुनील कृष्ण व्यास द्वारा कथा के माध्यम से राम विवाह का प्रसंग सुनाया गया l बताया गया कि मिथिला के राजा जनक ने माता सीता के विवाह हेतु स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर में शर्त रखी गई कि जो भी वीर भगवान शिव के धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से माता सीता का विवाह होगा। देश-देशांतर से आए अनेक राजा और बलशाली योद्धा धनुष उठाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं सका।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम आगे बढ़े। श्रीराम ने अत्यंत सहजता और विनम्रता से धनुष उठाया और जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाई, शिवधनुष टूट गया। धनुष टूटने की तेज ध्वनि से पूरा जनकपुर गूंज उठा। इस चमत्कारिक क्षण को देखकर राजा जनक सहित सभी जन अचंभित रह गए।
शिवधनुष भंग होते ही राजा जनक ने माता सीता का हाथ भगवान श्रीराम को सौंपने की घोषणा की। इसके बाद विधि-विधान से राम-सीता विवाह संपन्न हुआ। कथा में लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह का भी उल्लेख किया गया।
राम विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन, जयकारों और मंगल गीतों का माहौल बना रहा।महिलाओं द्वारा नृत्य भी किया गया l ग्रामवासी स्वर्गीय सावित्री देवी मिश्रा की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजन किया जा रहा हे l कथा 12 फरवरी से प्रारंभ हुई थी जो 20 फरवरी तक चलेगीl कथा समापन पर महाआरती कर प्रसादी वितरण की जा रही हैl इस मौके पर आयोजन समिति के तूफान सिंह चौहान ने पत्रकारों का सराफा बंद साल से सम्मानित किया बड़ोद बताया कि रामकथा के आगामी दिनों में आगे के प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया जाएगा।












